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विवाह का समय और ज्योतिष

हर कोई यह जानना चाहता है कि, उस की शादी कब होगी। ज्योतिष के माध्यम से विवाह का समय निकालने के लिए लोग ज्योतिषी से परामर्श करते हैं ।  विवाह दो लोगों को एक साथ लाता है, जो अपना जीवन एक साथ बिताने का फैसला लेते हैं। ऐसा कहा गया है कि, जोड़ी स्वर्ग में बनती है, इसलिए जब भी विवाह का समय आता है, तब यह एक चिंता का कारण बनता है। हालांकि वैदिक ज्योतिष की मदद से हम इस समय का पता लगा सकते हैं, कि यह समय किसी के जीवन में कब आएगा।
नीचे कुछ कारक हैं, जिस से एक व्यक्ति ज्योतिष की मदद  से विवाह का समय का पता लगा सकता है।
लड़कियों के मामले में 90% ध्यान हम बृहस्पति और उसके प्रभावों को देते हैं, जैसा की यह उनके पति को दर्शाता है। शुक्र का अध्ययन भी करना होता है, क्योंकि यह शादी का कारक है, और यह पुरुषों के शादी को दर्शाता है। शनि ग्रह का भी अध्ययन जरूरी होता है, जो कि शादी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसके अलावा राहु और केतु का भी, जो शादी में देरी ला सकते है। सामान्य नियम के मुताबिक शादी की गणना 7 वें घर  के  मालिक, 7 वें घर में स्थित ग्रहों और निम्नलिखित कारकों को विचार रखकर किया जा सकता है।

 विवाह के समय के लिए कुछ महत्वपूर्ण कंडीशन इस प्रकार हैं-

  1. विवाह 7 वें घर  के  मालिक की दशा अवधि के दौरान या ग्रहों जो 7 वें घर  में स्थित है, के दौरान हो सकता है।
2. शादी की उम्र के दौरान जो के  24 – 28 साल  के करीब ले, महत्व 7 वें घर  के  मालिक और 7 वें घर में स्थित ग्रहों  को दिया जाना चाइये  ।
3. जब 7 वां घर कुछ ग्रह द्वारा  दृष्टिकोण  है, तो उस ग्रह की महादशा वांछित पुरस्कार दे सकता है।
4. जब उस ग्रह की महादशा या अंतर्दशा  हो  जो 7 वें घर को दृष्टि दे रहे हो |
5.   2रे और 4थे घर की अंतर्दशा या महादशा।
6. बृहस्पति गोचर  में 7वें घर, 5वें घर और लग्न को दृष्टि दे रहा हो तो प्रेम विवाह के  चांस अधिक होते है ।
शादी के समय को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों में से 7वें घर की राशि है। उदाहरण के तौर पर अगर  राशि बुध के अंतर्गत आता है, तो यह शादी,   22 वें वर्ष से पहले होने की संभावना है।  अगर राशि शनि ग्रह के अंतर्गत आता है, तो यह शादी जन्म के 30 वें वर्ष के बाद भी शादी  हो सकती है।

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