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ग्रहों की कौनसी दशाएं बनाती हैं प्रबल संतान योग

कुंडली में संतान योग

जिस तरह विवाह के बिना किसी भी व्यक्ति का जीवन अधूरा माना जाता है उसी प्रकार संतान के बिना भी परिवार को अधूरा ही माना जाता है। बच्चों की किलकारियों से घर के आंगन में जीवन जीवंत हो उठता है। अक्सर देखा जाता है कि विवाह के तुरंत बाद नव दंपति संतान के लिये योजना बनाने लगते हैं। साल भर बाद कुछ के आंगन में नया मेहमान दस्तक दे देता है। अगर विवाह के बाद दंपति चाहे सोच समझकर ही बच्चा पैदा करने में देरी कर रहे हों लेकिन परिजन, मित्रगण, रिश्तेदार हर तरफ से आप पर संतानोत्पत्ति के लिये दबाव बनाया जाता है। बहुत बार ऐसा भी होता है कि आपके लाख चाहने पर भी संतान का योग नहीं मिल रहा होता और बहुत बार आपके न चाहने पर भी आपको यह खुशखबरी मिल जाती है। क्या आप जानते हैं कि आपके साथ ऐसा क्यों है। ऐस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों के पास आपके इस सवाल का जवाब है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जातक की जन्मकुंडली में ग्रहों की दशा से यह पूर्वानुमान लगाया जा सकता है कि जातक की कुंडली में संतान का योग है कि नहीं। तो आइये जानते हैं ऐसे कौनसे योग हैं आपकी कुंडली में जो बताते हैं कि आपको जीवन में संतान का सुख प्राप्त होगा या नहीं।


ग्रहों की कौनसी दशाएं बनाती हैं प्रबल संतान योग


एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जब पंचम पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो तो संतान योग बनने की संभावनाएं प्रबल होती हैं। जब जातक की कुंडली में शुक्र अच्छा होता है तो वह गर्भ में शिशु कन्सीव होने के लिये एक शुभ योग बनाता है। अब गर्भ में शिशु स्वस्थ रहे और स्वस्थ ही वह जन्म ले इसके लिये बृहस्पति का शुभ होना मंगलकारी माना जाता है। लग्नेश एवं पंचमेश का संबंध भी संतानोत्पत्ति के लिये अच्छा योग बनाता है। बृहस्पति का लग्न में या भाग्य में या एकादश में बैठना और महादशा में चलना भी संतान उत्पति का प्रबल योग बनाता है। जब शुक्र पंचम को देख रहा हो या वह पंचमेश में हो तो इन परिस्थितियों में संतान पैदा होने की तमाम संभावनाएं जन्म लेती हैं। इस प्रकार यदि कोई जातक संतान को लेकर चिंतित है तो उसे स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ अपनी कुंडली का अध्ययन विद्वान ज्योतिषाचार्यों से अवश्य करवाना चाहिये और जानना चाहिये कि कहीं ग्रहों की दशा प्रतिकूल तो नहीं। कहीं संतान उत्पति में देरी का कारण ग्रहों की यह प्रतिकूल दशा तो नहीं।

ग्रहों की कौनसी दशा से होता है संतान उत्पति में विघ्न

ग्रहों के शुभ योग से संतान उत्पति की संभावनाएं तो पैदा होती हैं लेकिन यदि ग्रहों के इस शुभ योग पर पाप ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो तो ऐसी परिस्थितियों में संतान उत्पति में में विलंब हो सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि पंचम स्थान पर राहू की दृष्टि पड़ रही हो तो ऐसे में संतान को हानि पहुंच सकती है। यहां तक बच्चे के लिये प्राणघातक योग भी बन जाता है अन्यथा बाधा तो पहुंचती ही है। संतान उत्पति का कारक घर पंचम है यदि इस पर पाप ग्रहों की दृष्टि पड़ती है तो इससे नकारात्मक योग बनता है। इससे संतान होने में बाधा होती है। कभी कभी संतान मृत पैदा होती है या फिर पैदा होने के कुछ समय बाद उसकी मौत हो जाती है तो उसका कारण भी ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यही पाप ग्रह होते हैं।

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कुंडली में सरकारी नौकरी के योग

कुंडली में सरकारी नौकरी के योग

व्यक्ति के जीवन में हो रहीं, छोटी या बड़ी हर प्रकार की घटनाओं के लिए कुंडली के ग्रहों का बहुत बड़ा हाथ होता है। कुंडली में जिस प्रकार का ग्रह शक्तिशाली होता है उसी प्रकार के परिणाम भी व्यक्ति को प्राप्त होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि अथक मेहनत और परिश्रम के बाद भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी प्राप्ति में सफलता नहीं मिल रही होती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकारी नौकरी का निर्धारण व्यक्ति की योग्यता, शिक्षा, अनुभव के साथ-साथ उसकी जन्मकुंडली में बैठे ग्रह योगों के कारण भी होता है। आइये जानते हैं कि वह कौन-से ग्रह योग होते हैं जो सरकारी नौकरी प्राप्ति में मदद करते हैं।


सरकारी नौकरी के लिए कुंडली में निम्न योगों का होना शुभ माना जाता है-


  • कुंडली में दशम स्थान को (दसवां स्थान) को कार्यक्षेत्र के लिए जाना जाता है। सरकारी नौकरी के योग को देखने के लिए इसी घर का आंकलन किया जाता है। दशम स्थान में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति की दृष्टि पड़ रही होती है तो सरकारी नौकरी का प्रबल योग बन जाता है। कभी-कभी यह भी देखने में आता है कि जातक की कुंडली में दशम में तो यह ग्रह होते हैं लेकिन फिर भी जातक को संघर्ष करना पड़ रहा होता है तो ऐसे में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति पर किसी पाप ग्रह (अशुभ ग्रह) की दृष्टि पड़ रही होती है तब जातक को सरकारी नौकरी प्राप्ति में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अतः यह जरूरी है कि आपके यह ग्रह पाप ग्रहों से बचे हुए रहें।

  • अगर जातक का लग्न मेष, मिथुन, सिंह, वृश्चिक, वृष या तुला है तो ऐसे में शनि ग्रह और गुरु(ब्रहस्पति)  का एक-दूसरे से केंद्र या त्रिकोण में होना, सरकारी नौकरी के लिए अच्छा योग उत्पन्न करते हैं।
     

  • केंद्र में अगर चन्द्रमा, ब्रहस्पति एक साथ होते हैं तो उस स्थिति में भी सरकारी नौकरी के लिए अच्छे योग बन जाते हैं। साथ ही साथ इसी तरह चन्द्रमा और मंगल भी अगर केन्द्रस्थ हैं तो सरकारी नौकरी की संभावनायें बढ़ जाती हैं।
कुंडली में दसवें घर के बलवान होने से तथा इस घर पर एक या एक से अधिक शुभ ग्रहों का प्रभाव होने से जातक को अपने करियर क्षेत्र में बड़ी सफलताएं मिलतीं हैं तथा इस घर पर एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों का प्रभाव होने से कुंडली धारक को आम तौर पर अपने करियर क्षेत्र में अधिक सफलता नहीं मिल पाती है। 
ज्योतिष के अन्दर इस तरह की समस्या के लिए उपयुक्त उपचार भी मौजूद हैं। जातक की कुंडली का पूरा आंकलन करने के बाद ही उपायों को सुझाया जा सकता है। जो शुभ ग्रह कमजोर हैं उन्हें बलवान बनाकर और अशुभ ग्रहों को शांत कर, इस तरह की समस्याओं का अंत किया जा सकत

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मंगल दोष : कारण और निवारण क्या करें जब कुंडली में हो मंगल दोष



जिस जातक की जन्म कुंडली, लग्न/चंद्र कुंडली आदि में मंगल ग्रह, लग्न से लग्न में (प्रथम), चतुर्थ, सप्तम, अष्टम तथा द्वादश भावों में से कहीं भी स्थित हो, तो उसे मांगलिक कहते हैं।

  जिस जातक की जन्म कुंडली में 1, 4, 7, 8, 12वें भाव में कहीं पर भी मंगल स्थित हो उसके साथ शनि, सूर्य, राहु पाप ग्रह बैठे हों तो व पुरुष गोलिया मंगल, स्त्री जातक चुनड़ी मंगल हो जाती है अर्थात द्विगुणी

मांगलिक कुंडली का मिलान : वर, कन्या दोनों की कुंडली ही मांगलिक हों तो विवाह शुभ और दाम्पत्य जीवन आनंदमय रहता है। एक सादी एवं एक कुंडली मांगलिक नहीं होना चाहिए।

मंगल-दोष निवारण : मांगलिक कुंडली के सामने मंगल वाले स्थान को छोड़कर दूसरे स्थानों में पाप ग्रह हों तो दोष भंग हो जाता है। उसे फिर मंगली दोष रहित माना जाता है तथा केंद्र में चंद्रमा 1, 4, 7, 10वें भाव

शास्त्रकारों का मत ही इसका निर्णय करता है कि जहां तक हो मांगलिक से मांगलिक का संबंध करें। भी मांगलिक एवं अमांगलिक पत्रिका हो, दोनों परिवार पूर्ण संतुष्ट हों अपने पारिवारिक संबंध के कारण तो भी यह.संबंध श्रेष्ठ नहीं है, ऐसा नहीं करना चाहिए।

ऐसे में अन्य कई कुयोग हैं। जैसे वैधव्य विषागना आदि दोषों को दूर रखें। यदि ऐसी स्थिति हो तो 'पीपल' विवाह, कुंभ विवाह, सालिगराम विवाह तथा मंगल यंत्र का पूजन आदि कराके कन्या का संबंध अच्छे ग्रह योग वाले वर के साथ करें।  

मंगल यंत्र विशेष परिस्थिति में ही प्रयोग करें। देरी से विवाह, संतान उत्पन्न की समस्या, तलाक, दाम्पत्य सुख में कमी एवं कोर्ट केस इत्या‍दि में ही इसे प्रयोग करें। छोटे कार्य के लिए नहीं।

विशेष : विशेषकर जो मांगलिक हैं उन्हें इसकी पूजा अवश्य करना चाहिए। चाहे मांगलिक दोष भंग आपकी
कुंडली में क्यों न हो गया हो फिर भी मंगल यंत्र मांगलिकों को सर्वत्र जय, सुख, विजय और आनंद देता है।...
मांगलिक-दोष दूर करते हैं मंगल के 21 नाम। निम्न 21 नामों से मंगल की पूजा करें।
1. ऊँ मंगलाय नम:
2. ऊँ भूमि पुत्राय नम:
3. ऊँ ऋण हर्वे नम:
4. ऊँ धनदाय नम:
5. ऊँ सिद्ध मंगलाय नम:
6. ऊँ महाकाय नम:
7. ऊँ सर्वकर्म विरोधकाय नम:
8. ऊँ लोहिताय नम:
9. ऊँ लोहितगाय नम:
10. ऊँ सुहागानां कृपा कराय नम:
11. ऊँ धरात्मजाय नम:
12. ऊँ कुजाय नम:
13. ऊँ रक्ताय नम:
14. ऊँ भूमि पुत्राय नम:
15. ऊँ भूमिदाय नम:...
16. ऊँ अंगारकाय नम:
17. ऊँ यमाय नम:
18. ऊँ सर्वरोग्य प्रहारिण नम:
19. ऊँ सृष्टिकर्त्रे नम:
20. ऊँ प्रहर्त्रे नम:
21. ऊँ सर्वकाम फलदाय नम:  
विशेष: किसी ज्योतिषी से चर्चा करके ही पूजन करना चाहिए। मंगल की पूजा का विशेष महत्व होता है। अपूर्ण या कुछ जरूरी पदार्थों के बिना की गई पूजा प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती है।

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आंखों की गतिविधियों से भी जान सकते हैं ‘मांगलिक दोष है या नहीं’

ज्योतिष विधा के अनुसार मंगल ग्रह विनाशकारी माना गया है। यह जिस भी जातक की कुंडली में प्रवेश करता है, उसे नष्ट करके रख देता है। उसके जीवन में उथल-उथल मच जाती है, कोई भी कार्य सफल नहीं होता, तमाम कोशिशों के बाद भी वह असफल ही रहता है।

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार जन्म कुंडली में मंगल ग्रह के नीच अवस्था में होने से जातक को रक्त संबंधित बीमारियां सबसे पहले जकड़ लेती हैं। इसके अलावा वह जिस घर में वास करता है वहां बिजली के उपकरण जल्दी-जल्दी खराब होने लगते हैं। तो यदि आपकी कुंडली में भी मंगल दोष है तो आगे बताए जा रहे हैं कुछ उपाय।  रोज़ाना करें, जल्द ही आपको फर्क महसूस होगा...

मंगल दोष से पीड़ित जातक को छोटे भाई बहनों का ख्याल रखना चाहिए। धर्म शास्त्रों के अनुसार मंगलवार के दिन हनुमानजी के चरण से सिन्दूर ले कर उसका टीका माथे पर लगाने से हनुमान मंगल दोष को नष्ट कर देते हैं।



आप रोज़ाना या विशेष तौर पर मंगलवार के दिन बंदरों को गुड़ और चने खिलाएं। इसके अलावा अपने घर में लाल पुष्प वाले पौधे या वृक्ष लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए। समय-समय पर पौधे को पानी देना ना भूलें...

लेकिन क्या आप जानते हैं कि मंगल दोष से प्रभावी व्यक्ति को भूलकर भी ऐसी गतिविधियां नहीं करनी चाहिए जो उसके मंगल दोष को और भी बढ़ाए। उदाहरण के लिए यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल पीड़ित है तो उन्हें क्रोध नहीं करना चाहिए। जितना हो सके अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें।

आप कोई भी फैसला जल्दबाजी में ना लें, अन्यथा भारी नुकसान हो सकता है। खासतौर पर पैसों से जुड़ा फैसला सोच समझकर ही लें...

तो यदि आप मंगल दोष से पीड़ित हैं तो इन कार्यों को करने से बचें, लेकिन आप यदि जानते ही नहीं कि आप पर मंगल दोष है या नहीं तो हम आपको कुछ आसान टिप्स बताने जा रहे हैं। इसके लिए आपकी जन्म कुंडली देखने की भी आवश्यकता  नहीं है...

यदि सोते समय आपकी आंखे थोड़ी थोड़ी खुली रहती है या आपका मुंह सोते वक्त खुला रहता है। सामने की तरफ सीधा देखने पर भी आंख का हीरा या कॉर्निया थोड़ा उपर की तरफ हो या आंख के हीरे या कॉर्निया की नीचे की सफेदी दिखती हो तो इसका मतलब आप मांगलीक है।

यह बातें काफी दिलचस्प हैं, लेकिन यह जाने-माने ज्योतिषीय शोध का नतीजा ही है। यदि आपके साथ भी यही नतीजा सामने आता है तो तुरंत अपनी जन्म कुंडली का अध्ययन करवाकर जान लें... 
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कुंडली में कालसर्प दोष

अक्सर व्यक्ति कालसर्प दोष का नाम सुनते ही घबरा जाता है। कुंडली में कालसर्प दोष का पाया जाना कोई बहुत बड़ी घटना नहीं मानी जाती है। देखा जाता है कि 70 प्रतिशत लोगों की कुंडली में यह दोष होता है। आपको जानकार हैरानी होगी कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री जी की कुंडली में भी यह दोष था और तो और क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की कुंडली भी कालसर्प दोष से प्रभावित थी लेकिन फिर भी दोनों व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्रों में नाम और मान-सम्मान प्राप्त करने में सफल रहे।

कालसर्प दोष कुंडली में खराब जरूर माना जाता है किन्तु विधिवत तरह से यदि इसका उपाय किया जाए तो यही कालसर्प दोष सिद्ध योग भी बन सकता है। आइये तो जानते हैं कि क्या होता है यह कालसर्प दोष और किस प्रकार से यह व्यक्ति को प्रभावित करता है- 

जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु  और केतू ग्रहों के बीच अन्य सभी ग्रह आ जाते हैं तो कालसर्प दोष का निर्माण होता है। क्योकि कुंडली के एक घर में राहु  और दूसरे घर में केतु के बैठे होने से अन्य सभी ग्रहों से आ रहे फल रूक जाते हैं। इन दोनों ग्रहों के बीच में सभी ग्रह फँस जाते हैं और यह जातक के लिए एक समस्या बन जाती है। इस दोष के कारण फिर काम में बाधा, नौकरी में रूकावट, शादी में देरी और धन संबंधित परेशानियाँ, उत्पन्न होने लगती हैं।


कालसर्प दोष के प्रकार
प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में 12 प्रकार के कालसर्प योगों का वर्णन किया गया है-
1-अनन्त  2-कुलिक  3-वासुकि  4-शंखपाल  5-पद्म  6-महापद्म  7-तक्षक  8-कर्कोटिक 9-शंखचूड़  10-घातक  11- विषाक्तर  12-शेषनाग।


अनंत कालसर्प योग
अगर राहु  लग्न में बैठा है और केतु सप्तम में और बाकी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में तो कुंडली में अनंत कालसर्प दोष का निर्माण हो जाता है। अनंत कालसर्प योग के कारण जातक को जीवन भर मानसिक शांति नहीं मिलती। इस प्रकार के जातक का वैवाहिक जीवन भी परेशानियों से भरा रहता है।

कुलिक कालसर्प योग
अगर राहु कुंडली के दुसरे घर में, केतु अष्ठम में विराजमान है और बाकी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में है तब कुलिक कालसर्प योग का निर्माण होता है। इस योग के कारण व्यक्ति के जीवन में धन और स्वास्थ्य संबंधित परेशानियाँ उत्पन्न होती रहती हैं।

वासुकि कालसर्प योग
जन्मकुंडली के तीसरे भाव में राहु और नवम भाव में केतु विराजमान हो तथा बाकि ग्रह बीच में तो वासुकि कालसर्प योग का निर्माण होता है। इस प्रकार की कुंडली में बल और पराक्रम को लेकर समस्या उत्पन्न होती हैं।

शंखपाल कालसर्प योग
अगर राहु  चौथे घर में और केतु दसवें घर में हो साथ ही साथ बाकी ग्रह इनके बीच में हों तो शंखपाल कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसे व्यक्ति के पास प्रॉपर्टी, धन और मान-सम्मान संबंधित परेशानियाँ बनी रहती हैं।

पद्म कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के पांचवें भाव में राहु, ग्याहरहवें भाव में केतु और बीच में अन्य ग्रह हों तो पद्म कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसे इंसान को शादी और धन संबंधित दिक्कतें परेशान करती हैं।

महा पद्म कालसर्प योग
अगर राहु किसी के छठे घर में और केतु बारहवें घर में विराजमान हो तथा बाकी ग्रह मध्य में तो तब महा पद्म कालसर्प योग का जन्म होता है। इस प्रकार के जातक के पास विदेश यात्रा और धन संबंधित सुख नहीं प्राप्त हो पाता है। 

तक्षक कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के सातवें भाव में राहु और केतु लग्न में हो तो इनसे तक्षक कालसर्प योग बनता है। यह योग शादी में विलंब व वैवाहिक सुख में बाधा उत्पन्न करता है।

कर्कोटक कालसर्प योग
अगर राहु आठवें घर में और केतु दुसरे घर आ जाता है और बाकी ग्रह इनके बीच में हों तो कर्कोटक कालसर्प योग कुंडली में बन जाता है। ऐसी कुंडली वाले इंसान का धन स्थिर नहीं रहता है और गलत कार्यों में धन खर्च होता है।

शंखनाद कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के नवम भाव में राहु और तीसरे भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य हों तो इनसे बनने वाले योग को शंखनाद कालसर्प योग कहते है। यह दोष भाग्य में रूकावट, पराक्रम में रूकावट और बल को कम कर देता है।

पातक कालसर्प योग
इस स्थिति के लिए राहु दसंम में हो, केतु चौथे घर में और बाकी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में तब पातक कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसा राहु  काम में बाधा व सुख में भी कमी करने वाला बन जाता है।

विषाक्तर कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के ग्याहरहवें भाव में राहु और पांचवें भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य मे अटके हों तो इनसे बनने वाले योग को विषाक्तर कालसर्प योग कहते है। इस प्रकार की कुंडली में शादी, विद्या और वैवाहिक जीवन में परेशानियां बन जाती हैं।

शेषनाग कालसर्प योग
अगर राहु बारहवें घर में, केतु छठे में और बाकी ग्रह इनके बीच में हो तो शेषनाग कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसा राहु  स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें, और कोर्ट कचहरी जैसी समस्याएं उत्पन्न करता है।
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धन पाने के लिये दूध से करें ये ज्योतिषीय उपाय

यदि आपकी घर में धन नहीं ठहरता या हानि होती रहती है तो अपनी कुंडली के अनुसार आप ज्योतिषीय उपाय जान सकते हैं  ज्योतिषाचार्यों से। 

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धन पाने के लिये दूध से करें ये ज्योतिषीय उपाय
दूध स्वास्थ्य के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण आहार है, प्रोटीन से लेकर हमारी सेहत के लिये जरूरी विभिन्न तत्व दूध में होते हैं। दूध हमारी सेहत बनाने के लिये तो कारगर है ही लेकिन क्या आप जानते हैं दूध से धन प्राप्ति भी हो सकती है। नहीं नहीं दूध बेचकर पैसा कमाने की बात नहीं कर रहा उस तरीके से धन कमाने में मेहनत थोड़ी ज्यादा करनी पड़ती है। तो यहां हम आपको कुछ ऐसे ज्योतिषीय उपाय बता रहे हैं जिनके प्रताप से धन प्राप्ति की आपकी कामना पूर्ण हो सकती है।
देवी-देवताओं की पूजा में खासकर भगवान भोलेनाथ की, आपने दूध का इस्तेमाल होते देखा होगा। यदि आप शिवशंकर के उपासक हैं तो आपने जरूर शिवलिंग को दूध से नहालाया भी होगा। दरअसल ज्योतिष के विद्वान दूध को चंद्रमा का कारक मानते हैं। इसलिये ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिये विद्वान ब्राह्मण भी आपको शिवलिंग पर दूध अर्पित करने की सलाह देते होंगे। यदि आप राहू से पीड़ित हैं तो आपको सांप को दूध पिलाने का सूझाव भी अवश्य मिला होगा।
असल में इसके पिछे यही मान्यता काम करती है कि दूध सभी को प्रिय होता है जिसे चढ़ाने पर सभी देवता, ग्रह आदि प्रसन्न होते हैं और आप पर से उनका अशुभ प्रभाव कम हो जाता है और शुभ परिणाम मिलने लगते हैं।
कैसे करें उपाय
रात को सोने से पहले तो आप दूध पीते ही होंगे वह आपको अच्छी नींद देने के लिये अच्छा है यानि सेहत दुरूस्त करता है साथ ही यदि आप धन पाने के इच्छुक हैं तो एक गिलास दूध अपने बिस्तर के पास रखें मगर इतने पास भी नहीं कि नींद में आपका हाथ लगे दूध बिस्तर पर गिर जाये या फिर रात को आप उठें और गिलास आपके पैरों से टकराजाये और दूध फर्श पर दूध का गिरना बहुत अशुभ माना जाता है इसलिये सुरक्षित तरीके से गिलास को अपने बिस्तर के नजदीक टेबल आदि पर रख सकते हैं। अब करना आपको ये है कि सुबह उठकर नहा धौकर स्वच्छ हों व इस दूध के गिलास को ले जाकर बबूल के पेड़ की जड़ में डाल दें। बबूल का पेड़ कहां मिलेगा यह आपको ही खोजना पड़ेगा हालांकि इतना दुर्लभ पेड़ नहीं है आम तौर पर मिल जाता है। और हां यह उपाय आपको सिर्फ सोमवार को करना है यानि दूध रविवार की रात को रखें ताकि सोमवार सुबह आप उसे बबूल के पेड़ की जड़ में डाल सकें। उम्मीद है इससे आपके बिगड़े काम बनने और धन प्राप्ति की पूरी संभावना है।
यह दूसरा उपाय भी आपको सोमवार को करना है। स्नानादि के पश्चात स्वच्छ होकर कच्चे दूध का प्रबंध करें व शिवालय में जाकर शिवलिंग पर इस दूध को अर्पित करें। यदि आप लगातार सात सोमवार इस उपाय को करें तो आपके सारे कष्टों का अंत होने की प्रबल संभावानाएं हैं। दरअसल मान्यता है कि इससे न सिर्फ भगवान शिव की कृपा मिलती है बल्कि समस्त ग्रहों के अशुभ प्रभाव भी दूर जाते हैं।
अभी जो उपाय आपको बता रहे हैं उससे आपके घर में मां लक्ष्मी की कृपा स्थाई रूप से बनी रहेगी। आपको करना सिर्फ इतना है कि एक लोहे के बर्तन में स्वच्छ ताजा जल लेकर इसमें चीनी, दूध एवं घी को मिश्रित करें व पीपल के वृक्ष की छाया में खड़े होकर इस मिश्रण को जड़ में अर्पित करें। इससे आप पर मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहेगी।

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धन के लिये घर लगायें क्रासुला का पौधा

धन के लिये घर लगायें क्रासुला का पौधा

भारतीय वास्तु शास्त्र हो या चीनी वास्तु शास्त्र फेंगशुई, घर में सुख शांति व समृद्धि लाने के अनेक उपाय बताये गये हैं। सुख-शांति व समृद्धि के लिये धन एक बहुत ही जरूरी तत्व है। इसलिये धन पाने के भी कई तरीके वास्तु में मौजूद हैं। इन्हीं में से एक है धन प्राप्ति के लिये लगाये जाने वाले पौधे। धन के पौधे के नाम मशहूर मनी प्लांट के बारे में तो आप जानते ही होंगे अगर सही दिशा में इसे लगाया जाये तो यह काफी लाभकारी होता है लेकिन गलत दिशा में लगाने से नुक्सान भी उठाना पड़ता है। लेकिन हम अपने इस लेख में आपको मनी प्लांट के बारे में नहीं बल्कि ऐसे ही एक अन्य पौधे की जानकारी दे रहे हैं जिसे अपने घर में लगाकर आप धन प्राप्ति की कामना कर सकते हैं।
दरअसल फेंगशुई एक चीनी वास्तु शास्त्र है जो कि सकारात्मक व नकारात्मक ऊर्जा के सिद्धांत पर काम करता है। फेंगशुई वास्तु में जितने भी उपाय बताये जाते हैं वे घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर घर के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा को प्रवाहित करते हैं।

फेंगशुई के अनुसार धन देता है क्रासुला का पौधा

क्रासुला, यह बहुत ही मुलायम मखमली लगने वाला फैलावदार पौधा होता है जिसकी चौड़ी पत्तियां होती हैं। इसकी पत्तियों का रंग हरे और पीले रंग का मिश्रण जैसा होता है क्योंकि यह न तो सही से हरा होता है और न ही अच्छे से पीला बल्कि दोनों के मिले-जुले रंग सी पत्तियां होती हैं इसकी।
क्रासुला का यह पौधा दिखने में सुंदर, छूने में मखमली लगता है, लेकिन दिखने में यह जितना मखमली होता है इसकी पत्तियां उतनी ही मजबूत भी होती हैं। दरअसल ये रबड़ जैसी होती हैं जिन्हें छूने या हाथ लगाने से टूटने या मुड़ने का खतरा नहीं रहता। वहीं आपको इसकी ज्यादा देखभाल करने की भी जरूरत नहीं होती हफ्ते में दो या तीन बार भी आप इसे पानी दे देते हैं तो यह सूखता नहीं है। साथ ही इसके लिये कोई लंबी-चौड़ी जगह की भी आवश्यकता नहीं होती, एक छोटे से गमले में इसे लगाया जा सकता है। छांव में भी अपने आपको यह पौधा पाल लेता है।

घर में कहां पर लगायें क्रासुला का पौधा

फेंगशुई के अनुसार क्रासुला का पौधा घर का प्रवेश द्वार जहां से खुलता है उसके दाहिनी ओर रखना चाहिये।
फेंगशुई वास्तु शास्त्र में क्रासुला के पौधे को सकारात्मक ऊर्जा का बहुत ही अच्छा स्त्रोत माना गया है। मान्यता है कि घर में इस पौधे को रख लिया जाये तो यह पौधा घर में धन वृद्धि करता है। धन को घर की ओर खींचने लगता है। यानि यदि आपके घर में धन नहीं ठहरता है तो भी आप फेंगशुई के इस उपाय को अपना सकते हैं।

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